हेलो दोस्तों! आज हम इंडिया में बढ़ते मोबाइल फोन की कीमत पर बात करने वाले हैं !
जेब पर भारी पड़ रहा है आपका अपना फोन – समझिए पूरा मामला
सुबह उठते ही अलार्म। फिर दिन भर काम, शाम को गप्पें, रात को सोने से पहले आखिरी बार स्क्रॉल। यह सब कुछ एक छोटे से डिवाइस के सहारे चलता है। स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन गया है जैसे सांस लेना। लेकिन अब यही जरूरी डिवाइस हमारी जेब पर भारी पड़ने लगा है। कैसे? चलिए, बिना किसी उलझन के, बिल्कुल सीधी-सादी भाषा में समझते हैं।
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अभी कुछ ही घंटे पहले एक खबर ने सबको हिलाकर रख दिया। देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन के दाम एक साथ बढ़ा दिए हैं। सैमसंग हो, विवो हो या ओप्पो – तीनों ने अपने फोन के दाम में 40 फीसदी तक का इजाफा कर दिया है। यानी जो फोन कल तक दस हजार में मिल रहा था, उसके लिए आज चौदह हजार देने पड़ रहे हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है।
कंपनियां क्या कह रही हैं?
कंपनियों का तर्क है कि दुनिया भर में चिप्स की कमी हो गई है। साथ ही, उनके चलाने के खर्चे भी बढ़ गए हैं। यानी कच्चा माल महंगा हो गया तो बना हुआ माल भी महंगा बिकेगा। यह सुनने में बड़ा अजीब लगता है, लेकिन जब यही फोन हम खरीदते हैं तो हमारी जेब पर सीधा असर पड़ता है। सैमसंग, विवो और ओप्पो तीनों मिलकर भारत के कुल स्मार्टफोन बाजार के करीब 47 फीसदी हिस्से पर राज करते हैं। मतलब, हर दूसरा फोन जो इस देश में बिकता है, वह इन्हीं तीन कंपनियों में से किसी एक का होता है। पिछले साल भारत में 15 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन बिके थे, और उनमें से करीब सवा सात करोड़ फोन इन्हीं कंपनियों के थे। जब इतनी बड़ी कंपनियां एक साथ दाम बढ़ा देती हैं, तो इसका असर हर उस घर पर पड़ता है जहां कोई नया फोन खरीदने का सोच रहा होता है।
एक उदाहरण से समझिए
बात को और साफ करते हैं। सैमसंग की एक मिड-रेंज फोन की बात करते हैं। कंपनी ने अपना एक मॉडल जिसे पहले गैलेक्सी ए56 के नाम से जाना जाता था, अब नए नाम गैलेक्सी ए57 के साथ लॉन्च किया है। पुराना फोन 47,999 रुपये में मिलता था। नए फोन की कीमत है 62,499 रुपये। यानी करीब 30 फीसदी का इजाफा। तीस हजार के फोन अब चालीस हजार के हो गए हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। जब एक परिवार में दो-दो फोन होते हैं – एक माता-जी का, एक पिता-जी का, एक भाई-बहन का – तो इस बढ़ोतरी का मल्टीप्लायर इफेक्ट होता है।
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आम आदमी पर क्या बीत रही है?
गांव हो या शहर, अब हर कोई स्मार्टफोन चलाता है। ऑनलाइन पढ़ाई हो, मोबाइल बैंकिंग हो, राशन कार्ड से लेकर सरकारी योजनाओं तक – सब कुछ अब फोन के जरिए होता है। ऐसे में जब जरूरत का सामान महंगा हो जाता है, तो आम आदमी के पास कोई चारा नहीं बचता। वह या तो पुराने फोन से ही काम चलाता है, या फिर कर्ज लेकर नया फोन खरीदता है। और यह कर्ज भी आसान नहीं होता।
बात सिर्फ कीमतों की नहीं है, बात है उस अहसास की जब आप अपनी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ इसलिए निकाल देते हैं क्योंकि आपको दुनिया से जुड़े रहना है। क्या यह सही है? क्या कंपनियों को बस यही कहकर कीमतें बढ़ा देनी चाहिए कि “चिप्स महंगे हो गए हैं”? क्या उनके पास कोई और रास्ता नहीं है? ये वो सवाल हैं जो हर उस इंसान के मन में उठते हैं जो अपनी गाड़ी के पीछे बैठे रिक्शे वाले को दस रुपये ज्यादा देने से पहले दस बार सोचता है।
क्या त्योहारों पर मिलेगी राहत?
अब लोग सोच रहे हैं कि त्योहारों के मौसम में जब सेल लगती है, तब शायद दाम कम हो जाएं। लेकिन कंपनियों के इस कदम के बाद ऐसा लगता है कि इस बार सेल में भी ज्यादा राहत नहीं मिलेगी। हो सकता है कि कुछ पुराने मॉडल पर ऑफर आ जाएं, लेकिन नए फोन तो महंगे ही रहेंगे। और पुराने फोन में भी वो फीचर्स नहीं होंगे जो नए में होते हैं। यानी आपको एक बार फिर समझौता करना पड़ेगा।
असली सवाल यह है कि क्या यह बढ़ोतरी सिर्फ एक बार की है या आने वाले दिनों में और कंपनियां भी इसी राह पर चलेंगी। फिलहाल तो लगता है कि जल्द ही कोई राहत नहीं मिलने वाली। अगर एक्सपोर्ट कंपनियां भी इसी तरह दाम बढ़ाती रहीं, तो आम आदमी के लिए नया फोन खरीदना एक सपना बनकर रह जाएगा।
क्या कर सकते हैं आप?
अगर आप नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना समझदारी होगी। पहली बात – जरूरत को पहचानें। क्या वाकई नए फोन की जरूरत है या पुराना काम चला सकता है? दूसरी बात – अगर खरीदना ही है तो थोड़ा इंतजार करें। हो सकता है कि कुछ हफ्तों में पुराने मॉडल पर डिस्काउंट आ जाएं। तीसरी बात – दूसरे ब्रांड्स को भी देखें। बाजार में अभी भी कुछ छोटे ब्रांड्स हैं जिन्होंने अभी दाम नहीं बढ़ाए हैं। चौथी बात – एक्सचेंज ऑफर का फायदा उठाएं। अगर आपका पुराना फोन अच्छी स्थिति में है, तो उसे बेचकर या एक्सचेंज करके कुछ पैसे बचा सकते हैं।
लेकिन सबसे बड़ी बात – परेशान मत होइए। महंगाई आती है और जाती है। जरूरतें भी बदलती हैं। फोन एक जरूरत है, लेकिन यह सब कुछ नहीं है। परिवार, दोस्त, आपके अपने – यही असली धन हैं। बाकी सब तो गुजरता है।
एक बात और – इस खबर ने साफ कर दिया है कि अब हमें अपने बजट के हिसाब से ही फैसले लेने होंगे। चाहे सैमसंग हो या विवो या ओप्पो, उनका काम है मुनाफा कमाना। हमारा काम है समझदारी से खर्च करना। और हाँ, अगर कभी लगे कि कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, तो आवाज उठाने में संकोच मत कीजिए। सोशल मीडिया हो, ग्राहक सेवा हो – अपनी बात रखिए। कंपनियां तभी दाम घटाती हैं जब उन्हें लगता है कि ग्राहक उनका साथ छोड़ रहा है।
अब आप बताइए, क्या आपको लगता है कि यह दाम बढ़ोतरी सही है? क्या आपने हाल ही में कोई नया फोन खरीदा है या खरीदने की सोच रहे हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताइए। और हाँ, इस खबर को अपने उन सब दोस्तों के साथ साझा कीजिए जो नया फोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं। हो सकता है कि आपकी एक सूचना उनके हजारों रुपये बचा दे।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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सवाल: क्या सिर्फ सैमसंग, विवो और ओप्पो ने ही दाम बढ़ाए हैं?
जवाब: अभी इन तीनों ने साफ तौर पर दाम बढ़ाने का ऐलान किया है। बाजार में और भी कंपनियां हैं, उनके बारे में अभी कुछ साफ नहीं है। लेकिन जब बाजार की तीन बड़ी कंपनियां एक साथ कीमतें बढ़ा दें, तो दूसरी कंपनियां भी जल्द ही इस राह पर चल सकती हैं।
सवाल: कितने प्रतिशत तक दाम बढ़े हैं?
जवाब: करीब 40 फीसदी तक। लेकिन हर मॉडल पर यह बढ़ोतरी अलग-अलग हो सकती है। कुछ फोन पर 10-15 फीसदी तो कुछ पर 30-40 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला है।
सवाल: क्या पुराने फोन भी महंगे हो गए हैं?
जवाब: पुराने फोन जो पहले से स्टोर में पड़े हैं, उनकी कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ी हैं। लेकिन जैसे-जैसे पुराना स्टॉक खत्म होगा और नया माल आएगा, वैसे-वैसे नई कीमतें लागू हो जाएंगी।
सवाल: क्या ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह दाम बढ़े हैं?
जवाब: हां, कंपनियों ने अपनी एमआरपी बढ़ा दी है। इसलिए ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, हर जगह नई कीमतें लागू होंगी। हां, कुछ सेल्स के दौरान कार्ड डिस्काउंट या एक्सचेंज ऑफर से थोड़ी बचत हो सकती है।
सवाल: क्या सेकेंड हैंड फोन खरीदना सही रहेगा?
जवाब: अगर आपका बजट कम है और आपको नए फीचर्स की जरूरत नहीं है, तो सेकेंड हैंड फोन एक अच्छा विकल्प हो सकता है। बस किसी भरोसेमंद सोर्स से खरीदें और फोन की स्थिति जरूर चेक करें।
सवाल: क्या त्योहारी सीजन में दाम कम हो जाएंगे?
जवाब: त्योहारों पर सेल लगती है, लेकिन इस बार कंपनियों ने पहले ही एमआरपी बढ़ा दी है। सेल में ऑफर मिल सकते हैं, लेकिन पुरानी कीमतों पर फोन मिलना मुश्किल लग रहा है। फिर भी, थोड़ा इंतजार करके देख लेने में कोई हर्ज नहीं है।
सवाल: क्या चिप्स की कमी वाली बात सच है?
जवाब: दुनिया भर में सेमीकंडक्टर चिप्स की मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ा हुआ है। यह सच है कि चिप्स महंगे हुए हैं। लेकिन 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी सिर्फ चिप्स की कमी से नहीं समझाई जा सकती। कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।
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आखिरी बात – हिम्मत मत हारिए
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दोस्तों, महंगाई आती है और जाती है। फोन की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन आपकी जरूरतें और आपके सपने कम नहीं होते। अगर आज नहीं खरीद पा रहे, तो कल खरीद लेंगे। इस बीच, अपने पुराने फोन को थोड़ा साफ करें, कुछ अनचाहे ऐप्स हटाएं, और देखें कि वह कितना अच्छा काम करता है। हो सकता है कि आपको नए फोन की जरूरत ही न पड़े।
और हां, जब भी कोई बड़ी कंपनी ऐसा कदम उठाए, तो बेझिझक सवाल पूछिए। क्या हम ग्राहक नहीं हैं? क्या हमें सस्ता और अच्छा उत्पाद पाने का हक नहीं है? एक साथ आवाज उठाइए, सोशल मीडिया पर बात कीजिए, अपने दोस्तों को बताइए। बदलाव तभी आता है जब हम सब मिलकर बोलते हैं।
तो बस, यही थी आज की बात। अपना और अपनों का ख्याल रखिए। और हाँ, फोन की स्क्रीन से थोड़ी दूर भी हो जाइए कभी-कभार। असली दुनिया भी बहुत खूबसूरत है।
खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया। अगली खबर में फिर मिलेंगे। तब तक के लिए, खुदा हाफ़िज़
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