कहानी का शीर्षक: सूझ-बूझ की कीमत

Rahmet Chacha ki Kahani: जानिए कैसे एक बूढ़े बढ़ई ने अपने तजुर्बे से बनाया नायाब तख़्त। A heart-touching Hindi story with a great lesson."







एक बहुत ही आलीशान रियासत थी, जिसके बादशाह अपनी दरियादिली और इंसाफ के लिए मशहूर थे। उसी रियासत में एक बूढ़ा बढ़ई (Carpenter) रहता था, जिसका नाम था रहमत चाचा। रहमत चाचा ने अपनी पूरी जिंदगी लकड़ी के बेहतरीन काम करने में गुजार दी थी, लेकिन अब उम्र ज्यादा होने की वजह से उनकी नजर कमजोर हो गई थी और हाथ कांपने लगे थे।

हुनर की परख

एक दिन बादशाह सलामत ने ऐलान किया कि उन्हें अपने खास दरबार के लिए एक ऐसा तख्त (Throne) बनवाना है जो दिखने में सादा हो, लेकिन उसमें एक ऐसी खूबी हो जो आज तक किसी ने न देखी हो। शहर के बड़े-बड़े नौजवान कारीगर आए, सबने अपनी कला दिखाई, लेकिन बादशाह को किसी का काम पसंद नहीं आया।

रहमत चाचा ने जब यह सुना, तो वे लाठी टेकते हुए दरबार पहुंचे और बोले, "जिल्ले-इलाही, अगर आप इजाजत दें, तो यह अदना सा गुलाम भी एक कोशिश करना चाहता है।"

दरबार में मौजूद लोग हंसने लगे। एक नौजवान कारीगर बोला, "चाचा, आपसे तो अब आरी भी ठीक से नहीं पकड़ी जाती, आप बादशाह के लिए तख्त क्या बनाएंगे?"

मेहनत और सब्र

बादशाह ने सबको चुप कराया और रहमत चाचा को काम करने का मौका दिया। रहमत चाचा ने पूरे एक महीने तक एक बंद कमरे में काम किया। उन्होंने न तो कोई कीमती हीरा लगाया और न ही उस पर सोना जड़ा।

जब एक महीने बाद पर्दा हटा, तो सबके सामने एक लकड़ी का साधारण सा दिखने वाला तख्त था। लोग फिर से बातें बनाने लगे कि इसमें क्या खास है? यह तो कोई भी बना सकता था।

असलियत का खुलासा

बादशाह जब तख्त पर बैठने के लिए आगे बढ़े, तो रहमत चाचा ने कहा, "आलीजां, रुकिए! इस तख्त की खूबी इसकी चमक में नहीं, इसके सुकून में है।"

चाचा ने तख्त के एक छोटे से कोने को दबाया। अचानक उस लकड़ी के तख्त से ऐसी खुशबू आने लगी जैसे पूरे दरबार में चमेली के फूल खिल गए हों। चाचा ने बताया कि उन्होंने लकड़ी के अंदर ऐसी बारीक नालियां बनाई थीं, जिनमें कुदरती इत्र भरा गया था, जो केवल बैठने के दबाव से ही बाहर निकलता था।

इतना ही नहीं, उस तख्त की बनावट ऐसी थी कि उस पर बैठते ही इंसान की पीठ का सारा दर्द और थकान गायब हो जाती थी। रहमत चाचा ने अपनी बरसों की तजुर्बेकारी (Experience) का इस्तेमाल किया था।

कहानी की सीख (Moral)

बादशाह बहुत खुश हुए और उन्होंने रहमत चाचा को सोने की अशर्फियों से मालामाल कर दिया। उन्होंने उन नौजवान कारीगरों से कहा, "याद रखो, जवानी का जोश अच्छा है, लेकिन बुज़ुर्गों का तजुर्बा और उनकी हिकमत (Wisdom) वो दे सकती है जो कोई नई मशीन या चमक-धमक नहीं दे सकती।" इस तरह की कहानी पढ़ने के लिए हमें फॉलो करें और कॉमेंट करके जरूर बताएं


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