एक बहुत ही आलीशान रियासत थी, जिसके बादशाह अपनी दरियादिली और इंसाफ के लिए मशहूर थे। उसी रियासत में एक बूढ़ा बढ़ई (Carpenter) रहता था, जिसका नाम था रहमत चाचा। रहमत चाचा ने अपनी पूरी जिंदगी लकड़ी के बेहतरीन काम करने में गुजार दी थी, लेकिन अब उम्र ज्यादा होने की वजह से उनकी नजर कमजोर हो गई थी और हाथ कांपने लगे थे। हुनर की परख एक दिन बादशाह सलामत ने ऐलान किया कि उन्हें अपने खास दरबार के लिए एक ऐसा तख्त (Throne) बनवाना है जो दिखने में सादा हो, लेकिन उसमें एक ऐसी खूबी हो जो आज तक किसी ने न देखी हो। शहर के बड़े-बड़े नौजवान कारीगर आए, सबने अपनी कला दिखाई, लेकिन बादशाह को किसी का काम पसंद नहीं आया। रहमत चाचा ने जब यह सुना, तो वे लाठी टेकते हुए दरबार पहुंचे और बोले, "जिल्ले-इलाही, अगर आप इजाजत दें, तो यह अदना सा गुलाम भी एक कोशिश करना चाहता है।" दरबार में मौजूद लोग हंसने लगे। एक नौजवान कारीगर बोला, "चाचा, आपसे तो अब आरी भी ठीक से नहीं पकड़ी जाती, आप बादशाह के लिए तख्त क्या बनाएंगे?" मेहनत और सब्र बादशाह ने सबको चुप कराया और रहमत चाचा को काम करने का मौका दिया। रहमत चाचा ने पूरे ...